लकड़हारे की कहानी, children stories in hindi

children stories in hindi

लकड़हारे की कहानी, (children stories in hindi) यह कहानी आपको पसंद आएगी हमे जीवन में कुछ भी हासिल नहीं हो रहा हो तब भी आपको अपनी हिम्मत नहीं हारनी है, आपको जीवन में सही फैसले लेने चाहिए और हमे इस बात का भी ध्यान रखना होगा की लालच हमे कभी नहीं करना है यह हमे कभी भी मुसीबत में डाल सकता है, इसलिए जीवन के फैसले सोच कर ही ले, तभी आगे बढे.

लकड़हारे की अच्छी कहानी : children stories in hindi

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children stories in hindi

लकड़हारा हर रोज जंगल में लकड़ियां काटने जाया करता था लकड़हारे के पास उसका एक गधा था जिस पर लकड़ियां काट कर वह अपने घर पर लाया करता था लकड़हारे का गधा यही सोचा करता था कि हर रोज यह मुझ से काम लेता है लेकिन मुझे इतना भोजन नहीं देता है जिससे मेरे शरीर में ताकत आये, लकड़हारा इस बात को जानता था कि उसे खाने की समस्या बहुत ज्यादा थी क्योंकि लकड़ियां बेच कर भी वह उतना सामान नहीं खरीद पाता था जिससे उसकी सारी जरूरतें पूरी हो सके

 

लकड़हारे का गधा कभी-कभी ऐसा करता था कि वह जाने के लिए उठता ही नहीं था लकड़हारे को बहुत परेशानी होती थी क्योंकि जिस समय गधा नहीं उठता था वह उस वक्त अपने सिर पर रखकर लकड़ियों को लेकर आया करता था 1 दिन की बात है लक्कड़ हारा अपने गधे के साथ लकड़ियों को लेने जा रहा था तभी वह एक पेड़ पर चढ़ा जिस पेड़ के नीचे एक तालाब था लकड़हारे उस पेड़ पर चढ़कर बहुत ही सावधानी से लकड़ियां काट रहा था लेकिन लकड़ी काटते वक्त थी उसकी कुल्हाड़ी पानी में गिर गई

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लकड़हारे की कुल्हाड़ी पानी में गिरी तो बहुत परेशान होने लगा क्योंकि उसके पास एक ही कुल्हाड़ी थी और वह उसी से काम चलाता था दूसरी कुल्हाड़ी खरीदने का उसके पास इतना धन मौजूद नहीं था लकड़हारा पेड़ से नीचे उतरा और बैठ गया और सोचने लगा कि इस तालाब में पता नहीं मेरी मेरी कुल्हाड़ी कहां गिर गई है क्योंकि उसमें जाना खतरनाक हो सकता था लकड़हारा वहीं पर बैठा बस सोच रहा था कि अब क्या किया जाए तभी वह सोचने लगा कि मैं एक पत्थर को बांधकर तालाब में गिरा देता हूं और देखता हूं कि यह पत्थर कितना नीचे तक जाता है तभी उसने एक रस्सी और उसमें एक पत्थर बांधकर पानी के तालाब में फेंक दिया जब उसने देखा कि वह पत्थर पानी के नीचे जा रहा है और बहुत देर तक वह नीचे ही चला जा रहा था लकड़हारे को बहुत परेशानी हो रही थी सोच रहा था यह तालाब बहुत ज्यादा गहरा है इसमें उतरना बहुत ही खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसकी गहराई माप नहीं सकता था

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लक्कड़ हारा बैठा यही सोच रहा था कि मैं कैसे अपनी कुल्हाड़ी को प्राप्त करूं तभी तालाब में से एक देवी प्रकट होती है और वह कहती है कि तुम्हारी कुल्हाड़ी तालाब में गिर गई है इसलिए मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी को वापस लेकर आयी हु और अपनी कुल्हाड़ी को प्राप्त कर लीजिए लकड़हारा को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था यह सोच रहा था कि यह देवी कौन है जो मेरी मदद कर रही हो तालाब के अंदर से यह निकली है तभी उसकी नजर अपनी कुल्हाड़ी पर गई वह सोने की कुल्हाड़ी थी लकड़हारा यह सोच रहा था कि देवी के पास सोने की कुल्हाड़ी कहां से आई जबकि मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की बनी हुई थी

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तभी लकड़हारे ने कहा कि मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की बनी हुई है यह तो सोने की कुल्हाड़ी है यह मेरी कुल्हाड़ी नहीं है देवी ने कहा कि मेरे पास एक और खिलाड़ी है वह कुल्हाड़ी चांदी की बनी हुई है हो सकता है कि यह तुम्हारी कुल्हाड़ी और लकड़हारे ने कहा कि मेरी यह भी कुल्हाड़ी नहीं है मेरी तो लोहे की कुल्हाड़ी है जब बीवी ने देखा कि लकड़हारा बहुत ही ईमानदार है और उसे सोने और चांदी की कुल्हाड़ी लेने को तैयार नहीं है तो देवी उस पर प्रसन्न हो गई और कहा कि तुम्हें मैं तीनों ही कुल्हाड़ियां देना चाहती हूं क्योंकि तुम बहुत ही ईमानदार हो तभी लक्कड़ हारा तीनों कुल्हाड़ियां लेकर वापस आ गया और उसने चांदी की कुल्हाड़ी को भी बेच दिया जिससे कि उसको बहुत सारा धन प्राप्त हुआ और उसके खाने की समस्या भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगी

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तभी लकड़हारे का पड़ोसी उसके पास आया और पूछने लगा कि तुम्हारे तो  दिन बदल गए हैं जबकि तुम्हारे पहले जैसे हालात अब नहीं रहे लकड़हारे ने बताया है कि मैं एक तालाब के पास लकड़ियां काट रहा था मेरी कुल्हाड़ी तालाब में गिर गई और तालाब में से एक देवी प्रकट हुई और उसी ने मुझे उपहार में सोने और चांदी की कुल्हाड़ी दी है यह जानकर उसका पड़ोसी बहुत खुश हुआ और कहने लगा कि अब मुझे भी उपहार में बहुत सारी कुल्हाड़ियां मिल जाएंगी है जिसमें मैं अपनी स्थिति को सुधार पाऊंगा लकड़हारे को इस बात का पता नहीं था और अगली सुबह ही लकड़हारे का पड़ोसी उस तालाब के पास गया और लकड़ी काटने की बजाय उसने अपनी कुल्हाड़ी तालाब में गिरा दी

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कुछ देर बाद एक देवी प्रकट होगी और वह सोने और चांदी की कुल्हाड़ी को साथ में लेकर आई थी और कहने लगी कि तुम्हारी कुल्हाड़ी पानी में गिर गई थी क्या तुम बता सकते हो इनमें से तुम्हारी कुल्हाड़ी कौन सी है तभी वह पड़ोसी कहने लगा कि यह दोनों खिलाड़ी मेरी देवी समझ चुकी थी कि यह बेईमान आदमी है यह इमानदारी नहीं दिखा रहा है इसलिए देवी दोबारा तालाब में चली गई और इस प्रकार उसने अपनी कुल्हाड़ी भी खो दी थी, इसलिए हमें जीवन में कभी भी लालच नहीं करना चाहिए जो लोग लालच करते हैं वह हमेशा ही धोखा खाते हैं.

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लकड़हारे की कहानी, (children stories in hindi) हमे इस बात का ध्यान रखना चाहिए की लालच हमे कभी भी आगे बढ़ने नहीं देता है इसलिए आपको ऐसा नहीं करना चाहिए, अगर आपको यह कहानी पसंद आयी है तो आप इसे शेयर जरूर करे और हमे भी बताये,

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