बरसात की रात का डर एक कहानी, rochak kahaniya

rochak kahaniya

बरसात की रात का डर एक कहानी (rochak kahaniya) यह कहानी आपको पसंद आएगी क्योकि इस कहानी में ऐसा होता है जो आपके जीवन में कभी हुआ होगा या कभी भी हो सकता है इसलिए यह आपके लिए अच्छी कहानी साबित होगी, 

बरसात की रात का डर एक कहानी : rochak kahaniya

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रात हुई और बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी, कोई भी कही नहीं जा पा रहा था, तभी अचनक ही दरवाजा पर आवाज हुई और जैसे ही दरवाजा खोला तो वहां पर कोई नहीं था, ऐसा लग रहा था की हवा की वजह से दरवाजा हिला होगा क्योकि बहुत तेज हवा के साथ बारिश हो रही थी, कुछ दुरी पर दो आदमी खड़े हुए थे पता नहीं वह क्या करे थे क्योकि बिजली चली गयी थी, कुछ साफ़ नहीं दिख रहा था,

 

रात में इतना अँधेरा की कुछ भी नहीं दिख रहा था यह मौसम की वजह से भी हो रहा था मौसम काला हो चुका था, बिजली न होने के कारण भी अँधेरा चारो और छाया था वह दो आदमी जिनकी सिर्फ परछाई नज़र आ रही थी वह कौन हो सकते थे, घर पर आज कोई भी नहीं था क्योकि सभी लोग एक शादी में गए थे, जब कोई नहीं होता है तो बहुत डर भी लगता है

 

जब कुछ समझ नहीं आया तो फिर से कुर्सी पर बैठ गया था तभी फिर से दरवाजे पर जोर की आवाज आयी थी, अब कौन हो सकता है दुबारा फिर से पता नहीं कौन होगा पहले तो कोई भी नहीं था दरवाजा खुला पर फिर भी कोई नहीं था अब यकीन हो गया था की यह काम हवा से हो रहा है तभी अपनी खिड़की पर किसी की परछाई देखी पता नहीं कौन है खिड़की के पास यह देखने के लिए खिड़की के पास गया तो देखा कोई भी नहीं था, 

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आज पता नहीं क्या हो रहा था आज घर पर भी कोई नहीं था और आज ही मौसम भी खराब हो गया है और ऊपर से यह हवा चल रही थी, जिसके कारण कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था सभी लोग अपने घर पर थे और मुझे नहीं लगता है की कोई बहार होगा, क्योकि इतने बुरे मौसम में कोई बहार नहीं निकल रहा था, आज घर पर अकेला होना बहुत अजीब लग रहा था, अब कुछ नहीं कहा जा सकता था तभी फिर से दरवाजे पर दस्तक हुई थी, अब कौन हो सकता है,

 

फिर से दरवाजा खोलने के लिए जैसे ही गया तो ऐसा लगा की फिर से कोई खिड़की पर है, अब किधर जाये दरवाजे की और या खिड़की की और, आज यह सब चल क्या रहा है तभी सोचा की कही वह दोनों आदमी तो नहीं है जो मुझे यहां पर डरा रहे है, जब खिड़की से देखा तो वहा पर कोई भी नहीं था अब लग रहा था की वह आदमी ऐसा लगता है की चोर है जो चोरी करने के लिए यहां पर आये होंगे, 

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एक मौसम का डर दूसरा चोरो का डर, ऐसा लगता है की चोरो को पता चल चुका है की यहां पर में एकेला हु, लेकिन वह मुझे कैसे जानते है पता नहीं यह चोर कौन हो सकता है, किसी को बताने के लिए भी आज हवा की वजह से टेलीफ़ोन की तार टूट चुकी है अब किसी को भी कह नहीं सकते है अगर बहार गया तो हो सकता है की वह मुझे पकड़ ले, इसलिए अंदर के सभी दरवाजे खिड़की बंद करने चाहिए

 

उसके बाद चोरो पर नज़र रखनी चाहिए, कुछ देर बाद छुपकर बैठने में भलायी थी, कही से भी कोई आवाज नहीं आ रही थी सिर्फ मौसम के खराब होने की आवाज के अलावा, अभी दस मिनट ही हुई थी तभी दरवाजा फिर से खटखटाया, दरवाजे की और जाने की हिम्मत नहीं हो रही थी, क्योकि यह उन्ही चोरो का काम हो सकता है जो कुछ देर पहले बहार खड़े थे, दरवाजे पर फिर आवाज हुई, अब दरवाजा नहीं खोलना था हो सकता है की चोर बहुत ज्यादा हो, 

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अचानक ही खिड़की पर आवाज हुई थी, खिड़की पर कोई नहीं था मगर खिड़की पर आवाज थी, और इस तरह बैठे हुए काफी दिक्क्त हो रही थी तभी फिर से दरवाजा पर आवाज हुई थी, अब हिम्मत करके दरवाजे पर गया लेकिन कुछ भी आवाज नहीं हुई थी, ऐसा लग नहीं रहा था की कोई है मगर हो भी सकता है की कोई वहा पर हो, ऐसा करते हुए और सोचते हुए पूरी रात बीत गयी थी, जब सुबह हुई तो मौसम ठीक हो गया था मगर कोई चोर नहीं आया था

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इसका मतलब यह था की हवा की वजह से ही सब कुछ हो रहा था, हवा ही ऐसा कर रही थी और दिमाग में न जाने कितने अजीब ख्याल आ रहे थे, हो सकता है की आपके साथ ऐसा हुआ हो तो आपको सबसे पहले सब कुछ जान लेना चाहिए तभी आप किसी नतीजे पर जाए, 

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