रेगिस्तान का सफर कहानी भाग दो, Hindi kahaniya

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आप यहां पर रेगिस्तान का सफर भाग दो कहानी (Hindi kahaniya) पढ़ रहे है, पिछले भाग में आपने देखा की रंकित अपने माता-पिता के पास पहुंच चुका था, और उसका भाई संकेत भी वही पर था, दोनों भाई पहली बार मिले थे,

रेगिस्तान का सफर भाग दो कहानी :- Hindi kahaniya

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hindi kahaniya, अगर आपने पहली कहानी नहीं पढ़ी है यानी के आपने इसका भाग एक नहीं पढ़ा है (पहला भाग यहां पढ़े) तो हम आपके लिए यहां पर थोड़ा सा बता देते है जिससे आप इसे अच्छे से समझ सकते है, इस कहानी के पिछले भाग एक में रंकित अपने ताऊ जी के यहां पर जाने के सफर पर निकलता है, रंकित इस बात को नहीं जानता है की वह उसके असली माता-पिता है, न की वह उसके ताऊ जी है,

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रांकित बच्पन्न से ही अपने चाचा के यहां पर रहता है उसके चाचा के पास कोई लड़का नहीं था इसलिए रंकित को उसने ही पाला था, तभी से वह उसे पास ही था और आज पहली बार वह अपने ताऊ यानी के अपने माता-पिता के पास पहुंच गया है उसके बाद वह अपने भाई साकेत से भी मिला था, दोनों भाई आराम कर रहे थे और अब आगे पढ़ते है,   

 

अब रात हो चुकी थी रंकित सोने को जा ही रहा था की उसके ताऊ जी बोले की तुम तो बहुत जल्दी सोने जा रहे हो अभी तो तुम आये ही हो कुछ बात भी कर लेते है, रंकित बोला की आज तो में बहुत थक चुका हु और मुझे नींद भी आ रही है, कल बहुत साड़ी बाते करंगे, ताऊ जी ने कहा की ठीक है सो जाओ और अब तुम बहुत साल बाद यहां पर आये हो इसलिए तुम्हे यहां से जाने की जरूरत नहीं है,

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रंकित यह नहीं जानता था की उसके पिताजी उससे बाते करने के लिए बहुत बेताब हो रहे थे,

इतने साल बीत गए थे और आज मौका मिला था

अपने लड़के से बात करने का इसलिए वह पहुंच गए थे,

रंकित माँ को यह पता था इसलिए वह अपने बेटे को सब कुछ बताना चाहती थी,

मगर रंकित के पिता ने मना कर दिया था,

क्योकि इससे उसके भाई को यह अच्छा नहीं लगता और वह दुखी हो जाते, 

 

मगर एक माँ अपने बच्चे से कैसे दूर रह सकती है, लेकिन जो हुआ है

उसे तो उन्हें भुगतना पड़ता है, इसलिए उसी की माँ चुप रही थी,

माँ बताना चाहती थी मगर नहीं कह सकती थी,

अगली सुबह होते ही दोनों भाई उठे और

उनकी माँ ने बहुत अच्छा खाना त्यार कर लिया था,

साकेत ने कहा की आज में तुम्हे अपना शहर दिखाकर आयूंगा,

क्योकि तुमने यहां पर कुछ भी नहीं देखा है, 

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दोनों भाई ने खाना खाया और दोनों साथ में शहर की और निकल गए थे,

तभी रंकित ने कहा की कल जब में यहां पर आया था

तो उस सामान को बेचने वाली लड़की से मेरी मुलाकात हुई थी,

उसी ने तुम्हारे घर का पता बताया था,

साकेत ने कहा की मेरे बाबा यहां के बहुत बड़े दुकानदार है और

सभी छोटी-छोटी दूकान वाले मेरे बाबा के यहां से ही सारा सामान लेकर जाते है,

इसलिए सभी दुकानदार हमारे घर का पता जानते है,

 

रंकित को बहुत अच्छा लगा था, क्योकि उसके ताऊ जी को सभी लोग जानते है, तभी नगर में कुछ घोड़ो की आवाजे आने लगी थी, आवाजे सुनकर साकेत ने कहा की छुप जाओ, मगर रंकित ने पूछा की हमे क्यों छुपना है, हमे इसकी क्या जरूरत है, तभी साकेत ने कहा की जब भी घुड़सवार आते है तो राजा ने यह एलान किया की कोई भी व्यक्ति हमारे घोड़ो के बेच में नहीं आना चाहिए जो भी ऐसा करेगा उसे सजा मिलेगी,

 

यह सुनकर रंकित को अच्छा नहीं लगा था, क्योकि ऐसा क्यों होता है, यह राजा है या कोई जुल्म करने वाला है, तभी एक घोडा रुका और कहा की यहां से सभी लोग चले जाए क्योकि कुछ देर बाद यहां से राजकुमारी की सवारी आने वाली है कोई भी यहां पर नहीं दिखना चाहिए अगर ऐसा हुआ तो राजा के नियम के अनुसार उसे सजा मिलेगी, यह सब सुनकर लोग छिप गए थे रंकित और साकेत भी छिप गए थे

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कुछ देर इन्तजार करने पर राजकुमारी की सवारी आने लगी थी, रंकित का मन था की वह राज कुमारी को देखे मगर उसे सजा का भी दर लग रहा था, राजकुमारी की सवारी आने लगी थी, सभी लोग छुपे हुए थे, कोई भी नज़र नहीं आ रहा था, साकेत ने भी रंकित को छुपे रहने के लिए कहा था, रंकित ने देखा की एक खरगोश का बच्चा घोड़े के नीचे आने वाला है,

 

इसलिए रंकित भागकर उस खरगोश के पास गया और उसे बचा लिया था मगर यह क्या राजकुमारी की सवारी भी वही पर थी राजकुमारी ने देखा की उस लड़के ने उस खरगोश के बच्चे को बचा लिया था लेकिन सेनापति ने उस लड़के को पकड़ने का आदेश दिया क्योकि यह राजा के नियम के खिलाफ था, 

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सेनापति ने कहा की तुम्हे सबको यह पता होना चाहिए की जब भी राजकुमारी की सवारी aati है तो कोई भी यहां पर नहीं दिखना चाहिए मगर तुमने इस बात की कोई भी परवाह नहीं की थी, तभी तुम बीच में आ गए थे, इसलिए तुम्हे राजा के पास ले जाना होगा क्योकि इसकी सजा तुम्हे राजा ही दे पाएंगे, उधर साकेत बहुत दुखी था कल ही रंकित उनके यहां पर आया था और आज उसे राजा ने पकड़ लिया था,

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सेनापति रंकित को पकड़कर राजा के पास ले जाने लगे थे, रंकित को कोई भी परेशानी नहीं थी क्योकि वह राजकुमारी को देखना चाहता था, इसलिए वह आराम से उनके साथ चल रहा था, उधर साकेत घर पहुंचा और उसने सारी बात अपनी माँ को बता दी थी, उसी माँ बहुत परेशान होने लगी थी, साकेत के पिताजी घर पर नहीं थे इसलिए वह उन्हें बताने के लिए दूकान पर गया था,

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जब यह बात साकेत के पिताजी को पता चली तो उन्हें बहुत दुःख हुआ था, क्योकि रंकित आखिर उनका ही लड़का है यह बात वह अच्छी तरह से जानते थे, मगर राजा के नियम जो भी तोड़ता है वह सजा पाता है, रंकित के पिताजी जी इस बात को अच्छे से जानते थे, तभी साकेत ने अपने पिताजी से कहा की हमे कुछ करना होगा, और रंकित को लाना होगा, 

रेगिस्तान का सफर कहानी अगला भाग-3

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