अपने भाग्य का फल कहानी, real story in hindi

real story in hindi

हम सभी को अपने भाग्य से ही मिलता है (real story in hindi) जैसा हम कर्म करते है वैसा फल हमे मिलता है लेकिन अगर कोई यह सोचता है की दूसरे के भाग्य से उसे फायदा हो सकता है तो ऐसा नहीं होता है यह कहानी आपको पसंद आएगी,

अपने भाग्य का फल कहानी : real story in hindi

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real story in hindi

कोई भी काम नहीं बन रहा था, घर की परेशानी बढ़ती जा रही थी, धीरे-धीरे व्यापार भी कम हो गया था, मुश्किल से ही थोड़ा काम चल रहा था, तभी साहूकार आया और बोला की अगर तुम्हे कोई परेशानी है तो हमे बता सकते है, मगर सम्मू कुछ नहीं कहता था वह जानता था की अगर आज मदद ली भी तो कल उसे पूरा भी कारण होगा, क्योकि मेरे पास तो पहले ही कुछ भी नहीं है,

 

अपनी परेशानी में डूबा हुआ सम्मू बैठा था तभी उसके द्वार पर एक महाराज जी आये और बोले की कुछ खाने को दे दो बहुत भूख लगी है, सम्मू ने उनकी और देखा तो वह साधू महाराज कुछ खाने को मांग रहे है, इसलिए सम्मू अंदर गया और कुछ बचे हुए चावल लेकर आया और महाराज जी को दे दिए, साधु महराज ने पूछा की तुम्हारी परेशानी क्या है मगर सम्मू ने कुछ नहीं बताया

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तभी साधु जी ने कहा की तुमने हमे खाना खिलाया है इसलिए में तुम्हारे लिए कुछ करता हु, साधु जी ने कहा की तुम्हे जंगल में एक बहुत बड़ा पेड़ मिलेगा तुम उसकी पहचान आसानी से कर सकते हो, उसके फूल नीले रंग के होंगे, जब भी तुम उसके कुछ फूल लेकर उसकी जड़ के पास रखोगे तो तुम्हे वहा बहुत सारा धन दिखाई देगा मगर इस बात का ख्याल रखना की तुम्हे वहा पर हर रोज नहीं जाना है जब भी तुम्हे लगे की धन समाप्त हो गया है

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तभी तुम्हे उस पेड़ के पास जाना होगा, यह कहकर साधु जी चले गए थे, सम्मू को उनकी बात पर यकीन नहीं हो रहा था, तभी सम्मू की पत्नी आयी और बोली की महाराज जी क्या कह रहे थे सम्मू ने बताया की यह बात है तभी यह बात बताते हुए उनके पडोशी ने सुन लिया था, और वह भी घर गयी और अपने पति का सारी बात बता दी, मगर उसके पडोशी ने पहले सोचा की हमे पता लगाना होगा की यह सच है या नहीं इसलिए पहले मुझे सम्मू के पीछे जाना होगा, 

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जब सुबह हुई तो सम्मू उस साधु के द्वारा बताई जगह की और चलने लगा था कुछ देर तक जंगल में चलने के बाद उस पेड़ के पास पहुंच गया था जैसा की साधु जी ने बताया था सम्मू ने वैसा ही किया था पहले फूल थोड़ लिए उसके बाद पेड़ की जड़ पर रख दिया वह फूल बहुत सारे धन में बदल गए और सम्मू बहुत खुश हो गया था, वह धन लेकर चला गया था, उसका पडोशी देख रहा था,

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अब उसका पडोशी इस बात को जानता था की वह अभी धन नहीं ले सकता है उसे तब तक इंतज़ार कारण होगा, जब तक सम्मू का धन समाप्त नहीं हो जाता है, कुछ महीने बीत गए थे सम्मू का धन भी खत्म हो चूका था और वह धन लेने जा ही रहा था तभी उसका पडोशी उससे पहले वह पर पहुंच गया था उसने फूल को थोड़ा और जड़ में रख दिया था 

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जैसे ही उसने वह फूल जड़ में रखे तो वहां पर अचानक ही शेर आ गया था वह शेर को देखकर डर गया था और वहा से भागने लगा था शेर उसके पीछे और सम्मू का पडोशी आगे, कुछ देर बाद सम्मू भी वही आया और फिर से वही किया जैसा बताया गया था और फिर से वह धन मिल गया था और वह धन लेकर चला गया था,जब सम्मू घर पहुंचा तो उसे पता चला की उसके पडोशी को बहुत चोटे आयी है क्योकि उसके पीछे शेर पड़ गया था, इसलिए कहते है जिसके भाग्य में जो है वही होता है किसी और को इसका फल नहीं मिलता है, 

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