चालाक लोमड़ी की कहानी, kids hindi kahani

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यह की कहानी आपको पसंद आएगी क्योकि इसमें चालाक लोमड़ी अपने फायदे के लिए एक गधे से दोस्ती कर लेती है, लेकिन आप तो जानते ही है की गधे से दोस्ती कैसी हो सकती है, और उसके बाद क्या होता है यह आप कहानी में पढ़ सकते है.

चालाक लोमड़ी की कहानी : kids hindi kahani

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लोमड़ी को बहुत भूख लग रही थी मगर उसके पास आज कुछ भी खाने को नहीं था वह यही सोच रही थी की आज अगर खाना नहीं मिला तो क्या होगा, लोमड़ी ने सोचा की मुझे किसी से दोस्ती करनी होगी जो मेरे लिए खाने का भी प्रबंध करेगा लेकिन मुझे किसके पास जाना चाहिए तभी लोमड़ी को गधे की याद आयी और उसने सोचा की मुझे उसी के पास चलना चाहिए वह मेरी बातो में आ जाएगा

 

लोमड़ी गधे के पास गयी और बोली की क्या तुम मुझसे दोस्ती करना चाहते हो गधे ने कहा की इसमें क्या बात है हम दोस्ती कर लेते है लेकिन लोमड़ी ने कहा की जब भी मुझे जरूरत होगी तो मेरे लिए तुम खाना जरूर लाओगे और जब तुम्हे जरूरत होगी तो में तुम्हारे लिए खाने का प्रबंध कर दूंगी, गधे ने लोमड़ी की बात मान ली थी, और दोनों दोस्त साथ में जा रहे थे तभी वहा से एक हिरण जा रहा था और उन्हें देखकर वह हसने लगा

 

उसे हस्ते हुए देखकर लोमड़ी बोली की तुम क्यों हंस रहे हो, हिरण बोला की मुझे तो तुम्हे साथ में देखकर हसी आ रही है, एक तो वह गधा जो बेफकूफ है और एक बहुत चालाक है दोनों की दोस्ती बहुत अच्छी लग रही है लोमड़ी को गुस्सा आया और हिरण वहा से भाग गया था, गधे ने कहा की इसमें नाराज होने की जरूरत नहीं है वह सब तो ऐसे ही कह रहे है, एक दिन गधा बीमार पड़ गया था उसे बहुत भूख लग रही थी

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तभी गधे ने कहा की मेरे लिए घास लेकर दे दो मुझे बहुत भूख लग रही है और में बीमार भी हु, लोमड़ी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था क्योकि गधा बीमार पड़ चूका था अब जब दोस्ती की है तो थोड़ी बहुत निभानी भी पड़ेगी इसलिए लोमड़ी घास लेने के लिए चली गयी थी, कुछ देर बाद घास लेकर वापिस आयी और गधे ने बहुत अछि तरह से घास खायी और दोनों वही पर सो गए थे,

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लोमड़ी को कोई और योजना सोचनी चाहिए तभी जब शाम हुई तो गधे से लोमड़ी ने कहा की आज शाम को तुम मेरे लिए खाने का प्रबंध करोगे गधे ने कहा ठीक है में बहुत सारा खाना लेकर आता हु, तभी गधा वहा से खाना लेने के लिए चला गया था कुछ देर बाद गधा आया और बहुत सी घास भी उसके पास थी और गधे ने लोमड़ी से कहा की लो में खाना लेकर आ गया हु, और अब हम दोनों मिलकर खाएंगे, लोमड़ी ने जब देखा की यह तो बहुत साड़ी घास लाया है तो लोमड़ी ने कहा की तुम गधे के गधे ही रहोगे यह मेरा खाना नहीं है

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गधे ने कहा की यह मेरा खाना है जब में जंगल में गया तो मुझे नहीं पता था की तुम्हारा खाना कौन सा है इसलिए मुझे लगा की आज तुम इससे ही काम चला लोगी, लोमड़ी इस दोस्ती से परेशान हो गयी थी गधे का खाना ढूढ़ना मुश्किल नहीं है बल्कि लोमड़ी का कहाँ ढूढ़ना मुश्किल था गधे ने अपनी घास खानी शरू कर दी थी लोमड़ी उसकी और देखती रही और उसे भूख बहुत लग रही थी मगर अब कुछ नहीं हो सकता था लोमड़ी वहा से चली गयी थी,

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इस कहानी से यही सीख मिलती है की हमे दोस्ती के लिए कोई भी शर्त नहीं रखनी चाहिए हमे दोस्ती किसी भी लालच में नहीं करनी चाहिए, अगर हम अपनी दोस्ती में फायदा देखेंगे तो हमे नुक्सान जरूर होगा इसलिए सच्ची दोस्ती ही करनी चाहिए,

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