दहशत की रात एक कहानी, bhoot story in hindi

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दहशत की रात एक कहानी, bhoot story in hindi, यह कहानी हमे यही बताती है की हमे जीवन में सोचकर ही फैसले लेने चाहिए क्योकि गलत फैसला लेने से कुछ भी हो सकता है 

दहशत की रात एक कहानी : bhoot story in hindi

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यह तीन दोस्तों की कहानी है वह घूमते हुए काफी दूर तक आ गए थे, अब उनका वापिस लौटना मुश्किल था वह जब घर से निकले थे तब शाम हो चुकी थी मगर अब घर वापिस जाने में उन्हें काफी समय लग सकता था इसलिए उन्होंने ने उसी जंगल में रुकने की योजना बनाई थी लेकिन वह नहीं जानते थे की उनका यह फैसला बहुत ही डरावना हो सकता था वह वापिस जाना चाहते थे मगर कैसे जाए अब अँधेरा भी बहुत बढ़ गया था 

 

तीनो दोस्तों ने उस जंगल में रुकने के लिए जगह तलाश करनी शरू कर दी थी मगर कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था जंगल में पेड़ के अलावा भी कुछ और हो सकता था यह उन्हें पता नहीं था उन्हें सिर्फ एक बात का डर था की जंगल में कुछ और न आ जाए जैसे जंगली जानवर आदि, एक दोस्त ने कहा की अगर हम पेड़ पर बैठकर रात को बिता सकते है तो यह विचार केसा होगा, दूसरे ने कहा ठीक है मगर रात को नींद आ गयी तो बस नीचे ही गिरेंगे, यह विचार अच्छा नहीं है,

 

तीसरे ने कहा की अगर हम भी उनकी तरह ही झोपड्या त्यार कर ले तो केसा होगा किनकी तरह यह तो बताया नहीं अरे जैसा आदिवासी करते है उनकी तरह ही झोपड़िया बना लेते है, हां लगता है आसान है यहां पर सामान कहा है और रात को नीचे सोने में बहुत खतरा भी है कोई जानवर झोपडी में आ गया था फिर बचना मुश्किल है देख लो क्या हो सकता है तीनो का दिमाग अभी काम नहीं कर रहा था ऊपर से भूख भी लग रही थी 

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उनमे से एक दोस्त ने कहा की यह देखो भूख का इंतजाम तो हो गया है यह पेड़ अमरुद का है और बहुत से अमरुद लगे हुए है यहां से हम खा सकते है और अपना पेट भर सकते है फिर सभी दोस्तों ने अमरुद खा लिए और उनका पेट भी भर चूका था मगर अभी सुरक्षित स्थान नजर नहीं आ रहा था जिस जगह पर वह आराम कर सके, कोई जगह भी नहीं दिख रही थी तभी उन्होंने ने आगे बढ़ने का विचार बना लिया था अभी रात होने में काफी समय था

 

जब वह आगे बड़े तो एक पुराना टुटा हुआ, मकान नज़र आया था यह पहले कभी मिटटी का बना होगा आज टूट गया है तीनो ने सोचा की हमारा काम तो चल जाएगा हम तीनो यहां पर रुक सकते है, अब तीनो ने विचार किया की यह सब ठीक होगा वह सब उस मकान की और बड़े और अंदर जाने लगे तो उन्हें कुछ आभास सा हुआ था जैसा की सभी को लग सकता है की यहां कुछ अजीब है मगर क्या अजीब है यह नहीं दिख रहा था यह मकान बहुत टूट गया था

 

कुछ हिस्से तो बहुत बुरी हालत में थे मगर हमे यहां पर बसना थोड़ा ही है आज रात की बात है कल सुबह यहां से निकल जाएंगे उस मकान में एक कमरा थोड़ा ठीक था मगर साफ़ नहीं था उन्होंने ने उसे साफ़ किया और कुछ पेड़ के पत्ते भी लेकर उस जगह पर रख दिए थे, यहां पर रुकने के शिव और कुछ भी अनहि कर सकते थे तभी तीनो ने अंदर जाने के जो भी रस्ते थे सभी पर काटे वाली झाडी का प्रयोग किया था जिससे कोई भी जानवर अंदर न आ पाए और उसके बाद वह तीनो अंदर चले गए थे 

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नींद तो ऐसी जगह पर आती नहीं है मगर जब थक जाए तो क्या कहे फिर नींद आ ही जाती है, उनमे से एक उठा और बहार की और जाने लगा था बाकी दो सो रहे थे तभी बाकी दो को आवाज आयी की यहां पर क्यों सो रहे हो, उनमे से एक उठा और वह आवाज कहा से आ रही है यह सोचना शुरू कर दिया था मगर जब उसकी नज़र अपने तीसरे दोस्त पर गयी तो वह वहा पर नहीं था अब वह सोचने लगा की यह सब वही कर रहा है

 

उसने अपने दूसरे दोस्त को उठाया और पूछा की तीसरा दोस्त कहा गया है मगर वह नहीं जानता था क्योकि वह तो सो रहा था उसने कहा की वह हमे आवाज लगाकर डरा रहा है अब क्या करे, दूसरे दोस्त ने कहा की वह डरा ही नहीं सकता है क्योकि वह तो खुद बहुत डरता है  रात को बहार कैसे गया और कहा गया होगा चलकर देखते है, जब वह बहार आये तो कोई भी नहीं था लेकिन पास में एक बहुत बड़ा पेड़ था उस पर से आवाज आ रही थी की आज तुम मेरे घर में सोये हो तुम्हे इसकी सजा मिलेगी 

 

जब उन्होंने ने उस आवाज पर गौर किया तो वह उनके दोस्त की आवाज नहीं थी, तभी उनका तीसरा दोस्त भागते हुए उनके पास आ गया था और उसने बताया की मुझे किसी ने बहार बुलाया था और मुझे लगा की कोई हमे दुढ़ता हुआ आया होगा मगर बहार कोई नहीं था सिर्फ इस पेड़ से आवाज आ रही थी उसे देखकर में छिप गया था और जब तुम बहार दिखे तो में वापिस आ गया, हमे यहां से चलना चाहिए पता नहीं कौन पेड़ पर है, 

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उसके बाद फिर से आवाज आयी की तुम्हे यहां से चले जाना होगा इससे पहले की मुझे गुस्सा   आ जाए जब हम यहां पर आये थे तो कोई भी नहीं मिला हमे और जब इतनी रात हो गयी तो यहां पर अचानक ही कौन आ गया है वह पेड़ बहुत जोर से हिलने लगा था उसके हिलते देख अब उन्हें भी डर लग रहा था, उस पेड़ की हिलने की रफ़्तार ऐसी थी की जैसे बहुत जोर से हवा चल रही हो, उसके बाद वह तीनो वह से भागे और जब तक नहीं रुके जबतक उनके गांव की सीमा नहीं आ गयी,

 

उन्होंने ने कुछ भी नहीं देखा मगर उनका डर ही बता रहा था की वहा कुछ भी हो सकता है यह बात सभी के लिए है हम चाहे डरते हो या नहीं मगर किसी ऐसी जगह पर रुकना जरुरी नहीं है कभ-कभी डर बहुत ज्यादा भी लगता है इसलिए हमेशा संभलकर ही रहे.

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