राजा और साधू की कहानी, short stories in hindi

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राजा और साधू की कहानी

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लघु हिंदी कहानी, सेनापति भागता हुआ राजा के पास आया और कहने लगा राजा जी आप जल्दी मेरे साथ चलिए राजा ने पूछा क्या बात है तुम इतनी जल्दी यहां पर आ गए मैंने तो तुम्हें किसी काम से भेजा था वह पूरा हो गया है क्या, सेनापति ने कहा कि वह तो पूरा नहीं हो पाया लेकिन हमारा पड़ोसी राज्य हम पर हमला करने वाला है

 

इसलिए हमें बहुत जल्दी ही तैयारी करनी होगी नहीं तो वह हम पर हमला बोल देगा राजा ने जब यह बात सुनी तो वह सोचने लगा कि पड़ोसी राज्य तो हमारा मित्र हुआ करता था लेकिन वह हम पर हमला क्यों बोल रहा है सेनापति ने कहा कि इस बात का क्या कारण हो सकता है मुझे नहीं मालूम लेकिन हमारे गुप्तचरों ने यह बताया है कि कल सुबह की किरण होते ही दूसरा राज्य हम पर हमला बोल देगा

 

राजा को बहुत चिंता होने लगी थी क्योंकि बहुत ही कम समय बचा था युद्ध करने के लिए, तभी राजाजी साधु महाराज जी के पास गए जो कि हमेशा सलाह लेकर ही काम करते थे राजा के बहुत ही प्रिय साधु है साधु ने राजा को कहा कि हमें युद्ध नहीं करना चाहिए क्योंकि वह आपके मित्र हैं आपको उनसे बात करनी चाहिए तभी आगे सोचना चाहिए कि क्या करना है राजा जी ने कहा कि आप ही उन्हें समझाइए

 

साधु महाराज जी दूसरे राज्य के राजा से मिलने गए और पूछा कि आप लोग हम पर हमला क्यों बोलना चाहते हैं दूसरे राजा ने कहा कि हमारे को गुप्तचरों से पता चला है कि वह राजा हम पर हमला बोल रहा है इसलिए हम बहुत ही जल्दी तैयारी कर रहे हैं उन पर हमला बोलने के लिए, जबकि साधु महाराज ने कहा कि ऐसा तो कुछ भी नहीं है साधु महाराज जी ने कहा कि आपको लगता है भ्रम हो गया है

 

या आपको कोई चालाकी से फंसाना चाह रहा है जब बहुत खोजबीन की गई तो पता चला कि कोई तीसरे राज्य का राजा ही यह सब कुछ कर रहा था जिससे कि वह आपस में युद्ध करें और वह बीच में आकर दोनों को मार गिराय इस तरह साधु महाराज जी ने कहा है कि आपके मित्र बहुत ही अच्छे हैं

 

लघु हिंदी कहानी, आपको कोई भी फैसला लेने से पहले उनसे बात जरूर करनी चाहिए दूसरों की बातों में कभी नहीं आना चाहिए इस तरह दोनों राज्यों के द्वारा आपस में मिल गए और उन्होंने फैसला किया कि अब आगे से किसी की भी बात पर यकीन नहीं करेंगे जब तक कि हम उस बात को पूरी तरह से प्रमाणित ना कर दें इसलिए दोस्तों यह बात समझने योग्य है कि आप सुनी सुनाई बातों पर तुरंत विश्वास कर लेते हैं जबकि ऐसा नहीं है आपको उसकी बात की जड़ तक पहुंचना चाहिए तभी यकीन करना चाहिए.

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