मस्तराम की कहानी, mastram ki hasya kahani

Mastram ki hasya kahani | Mastram ki kahaniya

मस्तराम की कहानी, mastram ki hasya kahani आपको पसंद आएगी, हमारी जिंदगी में बहुत परेशानिया होती है अगर उस बीच में थोड़ी हसी भी शामिल हो जाए तो कितना अच्छा होता है, यह हास्य कहानी आपके लिए है, आप जरूर पढ़े,

मस्तराम की कहानी : mastram ki hasya kahani

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mastram ki hasya kahani

मस्तराम की अच्छी कहानी, (mastram ki hasya kahani) उस गांव में बहुत से लोग मस्तराम (mastram) को जानते थे, वह यह भी जानते थे की वह कोई भी काम नहीं करता था, और वह काम करे भी क्यों, क्योकि उसने कभी भी कोई काम नहीं करा था, इसलिए उसे कुछ भी नहीं आता था, एक दिन की बात है मस्तराम  ने अपने घर में देखा की आज उसके पास कुछ भी खाने को नहीं है, (mastram ki kahaniya)

 

क्योकि अभी तक वह अपने बचे हुए पैसों से ही अपना घर चला रहा था, अब उसके पास कुछ नहीं था, अब मस्तराम (mastram) की जिंदगी मुसीबत में आने वाली थी, वह सेट के पास गया और कहने लगा की मुझे कोई भी काम दे दो जिससे में अपने जीवन को चला स्कू, सेठ ने सोचा की यह मुसीबत का मारा है इसलिए उसने अपने यहां पर गाय का दूध निकलने के लिए रख लिया था,

 

सेठ ने कहा की कल से आ जाना जब सुबह हुई तो मस्तराम (mastram) काम करने के लिए निकला पड़ा था, जब वह पहुंचा तो उसने देखा की यहां पर बहुत सारी गाय है, इसका मतलब मुझे इन सब का दूध निकालना होगा, यह तो बहुत मुसीबत का काम है, लेकिन काम तो करना था करे भी कैसे जब कभी काम किया नहीं था,

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वह ऐसे ही बैठा रहा था, उसने सभी गाय के पास एक-एक बाल्टी रख दी थी, लेकिन कोई भी गाय दूध नहीं दे रही थी, जब बहुत देर हो चुकी तो सेठ आया और उसने देखा की मस्तराम (mastram) तो बैठा हुआ है, दूध तो निकाल नहीं रहा है, वह मस्तराम (mastram) के पास आया और बोला की तुम्हे दूध नहीं निकलना आता है क्या, लेकिन ऐसे तो काम नहीं होगा, सेठ ने कहा की तुम दूसरा काम कर लो,

 

सेठ बहुत अच्छा आदमी था, इसलिए उसने उसे दूसरा काम दिया था, अब उसे खेत में काम करना था, जिससे उसे काम भी मिलता रहेगा, वह खेत पर गया लेकिन उसने खेत की और देखा और सोचने लगा की लोग खेत में काम कैसे करते है, वह पुरे दिन खेत को देखता रहा था, मगर उसने कोई भी काम नहीं किया था,

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जब सेठ ने शाम को मुलाकात की और पूछा की खेत में काम हो गया मस्तराम (mastram) ने कहा की पूरा काम हो गया है, सेठ ने पूछा की जो गेहू बहार रखे थे वो भी अंदर रख दिए थे, मस्तराम  ने कहा की वो तो सब कुछ चूहों ने खा लिया था. में उन्हें देखता रहा था, एक चूहा आया और उसके बाद बहुत सारे चूहे आये वह चूहे मुझसे डर न जाए इसलिए में चुप गया था, धीरे-धीरे खेत में चूहों का मेला लग गया था, अब तक तो सारे गेहू खत्म हो गए होंगे,

 

सेठ बोला की यह तुमने क्या किया, मस्तराम (mastram) ने कहा की मुझे लगा की वह चूहे आपके है और आपने ही वह गेहू उनके लिए रखे है, इसलिए मेने उन्हें दूर नहीं किया था, अब सेठ को बहुत गुस्सा आ गया था, सेठ बोला की वह चूहे तुम्हे क्यों नहीं खा गए, तुम्हे मेने जो भी काम दिया वह तुमने नहीं किया था, इसलिए सेठ ने उसे वहा से निकाल दिया था,

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मस्तराम (mastram) ने कहा की आपको कोई काम देना नहीं आता है इसलिए में उस काम को दुढ़ता हु जो मुझसे हो पाए यह सब तो मेरे लिए बहुत कठिन काम है, सेठ को अब बहुत गुस्सा आ रहा था, इसलिए सेठ ने उसे पीटना शरू कर दिया था, मस्तराम ने भी सेठ को नहीं छोड़ा और उसे खूब पीटा और कहा की दुनिया में सारे मुश्किल काम मुझसे से कराना चाहता है और बैठकर खाना चाहता है आज बस बहुत हो गया, उनको देखकर कुछ और लोग आ गए थे उसके बाद मस्तराम वहा से चला गया था, अगर आपको यह मस्तराम की कहानी, mastram ki hasya kahani, mastram ki kahaniya, पसंद आयी है तो आप इसे शेयर जरूर करे और कमेंट करके हमे भी बताये.

 

Mastram ki hasya kahani : मस्तराम की दूसरी कहानी

mastram ki hasya kahani, mastram ki kahaniya, mastram को लग रहा था की मेरी कोई बात भी बात नहीं सुनता है इन लोगो को क्या हुआ है यह जानने के लिए मस्तराम रूप बदलकर लोगो के बीच जाता है वह लोगो की बाते सुनता है जिससे पता चल पाए की लोगो को क्या हुआ है लोग कहते है भाई तुम कौन हो, हमने कभी आपको गांव में नहीं देखा है मस्तराम कहता है की मुझे मस्तराम से परेशानी है आज तो फैसला हो जाना चाहिए सभी लोग कहते है की उसने क्या किया है तभी mastram कहता है की मेरी भेड़ लेकर चला आया है

 

मुहसे पूछा भी नहीं है की में भेड़ को ले जाऊ या नहीं, इस तरह की परेशानी आ रही है क्या आप बता सकते है की मुझे क्या करना चाहिए सभी लोग कहते है की जिस तरह आप परेशान है उसी तरह हम भी परेशान नहीं वह किसी की बात नहीं सुनता है इसलिए हमने भी यह फैसला किया है की अब से हम भी उसकी बात नहीं सुनते है तो अच्छा होगा, क्योकि उसकी हरकत से सभी परेशान है अगर हम यह बात उसे बता दे तो वह हमारे पीछे पड़ जाएगा तभी mastram अपना रूप दिखाता है सभी को पता चल गया है की यह तो मस्तराम है

 

mastram ki hasya kahani, mastram ki kahaniya, सभी लोग वहा से भागते है और कोई भी उस जगह पर नहीं रहता है क्योकि वह बहुत परेशान करता है यही कारण है की mastram से कोई कुछ नहीं कहता है अगर एक बार मस्तराम को पता चल जाए तो वह हमारा पीछा करता रहता है इसलिए सभी भाग गए थे कोई भी घर से नहीं निकल रहा था मस्तराम से सभी लोग परेशान हो जाते है अगर आपको यह मस्तराम की कहानी पसंद mastram ki hasya kahani, mastram ki kahaniya आयी है तो शेयर जरूर करे

 

मस्तराम और छतरी का सफर हिंदी कहानी, mastram ki hasya kahani

mastram ki hasya kahani, mastram ki kahaniya, मस्तराम ने ऊपर देखा तो एक हवाई जहाज नज़र आता है मस्तराम सोचता है की इस जहाज में कैसे बैठा जाए Because सभी लोग जहाज में घूमते है but मेने कभी भी जहाज में बैठकर नहीं देखा है वह एक आदमी से पूछता है की यह हवाई जहाज कहा पर रुकता है, मुझे बैठना है वह आदमी कहता है की यह गांव में नहीं रुकता है यह सभी गांव से ऊपर उड़ता है मस्तराम ने सोचा की आज तो पहाड़ी पर जाना ही होगा, यह हवाई जहाज मुझे वही से पकड़ना है, (mastram ki hasya kahani)

 

वह पहाड़ी पर जाता है but पहाड़ी भी बहुत ऊंची है वह जितना चढ़ रहा है उसे बहुत कम लग रहा है सोचता है की यहां पर मुझे चढ़ने में बहुत मुश्किल हो रही है but जहाज में चढ़ना है तो मुझे आगे तक जाना ही होगा, मस्तराम को एक आदमी नज़र आता है मस्तराम उससे पूछता है की तुम भी जहाज पकड़ने आये हो, वह आदमी कहता है की मुझे नहीं पता है की तुम क्या कह रहे हो, यहां पर जहाज नहीं आता है बल्कि जहाज तो पहाड़ी से ऊंचा उड़ता है मस्तराम को समझ आता है की अभी मुझे और ऊपर जाना चाहियें,

 

वह बहुत ऊपर आता है अब मस्तराम नीचे देखता है तो उसे बहुत डर लगता है Because सब कुछ छोटा नज़र आ रहा है but अभी तक कोई भी जहाज नज़र नहीं आया है तभी उसकी नज़र पैराशूट पर जाती है मस्तराम समझ जाता है की लगता है जहाज का तेल समाप्त हो गया है इसलिए सभी छतरी लेकर नीचे आ रहे है मुझे नहीं लगता है की आज जहाज मुझे मिल पायेगा, मुझे भी यही छतरी लानी चाहिए थी Because अब नीचे कैसे उतरा जाएगा, मस्तराम वही पर बैठकर सोचता है, तभी एक पैराशूट उसके पास आता है मस्तराम उसी पर कूद जाता है

 

mastram ki hasya kahani, mastram ki kahaniya, उसके बाद मस्तराम उस आदमी के पास आ जाता है वह कहता है की तुम यहां पर कैसे आये हो मस्तराम कहता है की जहाज मुझे नहीं मिला है इसलिए अब में भी छतरी से नीचे उत्तर जाऊंगा आज मस्तराम को बहुत अच्छा लग रहा था Because वह छतरी का सफर कर चुका था भले ही वह जहाज में नहीं बैठा था, अगर आपको यह कहानी पसंद आयी है तो शेयर करे,

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